Google का इन्कॉग्निटो मोड कैसे काम करता है?
इन्कॉग्निटो का डिक्शनरी मतलब होता है 'गुप्त'।
- आप नहीं चाहते कि आप जो भी ऑनलाइन सर्च करे आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री में आए, किसी पब्लिक कम्प्यूटर पे ब्राउज कर रहे हो तो वहां पर आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, कुकीज रिकॉर्डेड रहे।
गूगल क्रोम का 'इन्कॉग्निटो मोड' आपके लिए है।
- गूगल क्रोम का ब्राउज़िंग इन 'इन्कॉग्निटो मोड' आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री को निजी रखता है, प्राइवेट कंप्यूटर का उपयोग करते समय आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, कुकीज, साइट डेटा, इनपुट डाटा और पासवर्ड आपके डिवाइस/कंप्यूटर पर स्टोर नहीं होता।
- जब आप साधारण क्रोम ब्राउज़र इस्तेमाल करते है तो आपको अपने गूगल अकाउंट/खाते से लॉगिन करना होता है, लेकिन क्रोम 'इन्कॉग्निटो मोड' में ब्राउज़ कर रहे हैं, तो आप डिफ़ॉल्ट रूप से किसी भी खाते या साइट में लॉगिन/साइन-इन नहीं होते हैं।
- जो लोग आपके बाद आपके डिवाइस/कंप्यूटर का उपयोग करते हैं उन्हें आपकी गतिविधि दिखाई नहीं देगी।
- वेबसाइटें आपको एक नए उपयोगकर्ता के रूप में देखती हैं और जब तक आप साइन-इन नहीं करते तब तक आपकी पहचान गुप्त उपयोगकर्ता की तरह होती है ।
*** 'इन्कॉग्निटो मोड' काम कैसे करता ? है और इसके फायदे!
- इन्कॉग्निटो मोड उपयोगकर्ता को एक तरह से निजी ब्राउज़िंग सत्र/सेशन प्रदान करता है, सेशन बंद करने के बाद पीछे कोई सबूत नहीं छोड़ता, जैसे की कौनसी वेबसाइट विजिट की है, क्या जानकारी सर्च की है इत्यादि, जो की कूकीज के फॉर्मेट में सेव होती है।
- कुकीज़ : आपके द्वारा देखे जाने वाले वेबसाइट, इनफार्मेशन और गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र करती हैं, और आपके द्वारा सर्च किये हुई जानकारी के आधार पर आपको लक्षित विज्ञापन भेजते हैं, जो कभी-कभी भ्रमित और परेशान भी करती हैं।
- जब आप 'इन्कॉग्निटो मोड' से लॉग-आउट करते हैं तो ब्राउज़र इन कुकीज़ को हटा देते हैं, आपकी निजी जानकारी कही भी सेव नहीं होती।
- अगर आप होटल बुक कर रहे है और बार-बार एक ही होटल की वेबसाइट्स पे ब्राउज करते है तो ये वेबसाइटें कुकीज़ को सहेजती हैं, उन्हें पता चल जाता है की आप वास्तव में बुकिंग करने वाले है और आपकी एक्टिविटी देख के कीमते बढ़ा देते है। 'इन्कॉग्निटो मोड' में ब्राउज़िंग वेब-ट्रैकिंग को अक्षम करती है, सस्ते हवाई किराए या होटल बुकिंग खोजने में मदतगार साबित हो सकती है।
- आप एक ही साइट में विभिन्न खातों से लॉग इन कर सकते हैं, जैसे की विभिन्न IDs के साथ अलग-अलग ईमेल खातों में लॉगिन करना।
*** क्या इन्कॉग्निटो मोड पूरी तरह से सिक्योर है?
आपने जब भी इन्कॉग्निटो मोड खोला हो आपने वहां पे शायद ये लाइनें नहीं पढ़ी होगी ?
- आपकी हिस्ट्री को स्टोर नहीं करेगा, कुकीज को उस पर्टिकुलर सेशन में स्टोर नहीं करेगा, इनपुट डाटा स्टोर नहीं करेगा, बिल्कुल सच बात हैं इन्कॉग्निटो मोड स्टोर नहीं करेगा।
- लेकिन वहां एक साफ़ लिखा होता है कि आपकी ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर जैसे की जिओ, बीएसएनएल ) आपकी गतिविधि ट्रैक कर सकते है।
- अगर आप प्राइवेट नेटवर्क में ब्राउज करते है ,ऑफिस या स्कूल का नेटव्रक इस्तेमाल करते है तो वो ऑफिशियली आपकी गतिविधि ट्रैक कर सकते हैं ऐसे में गवर्मेंट भी आपको ट्रैक कर सकती है और हम बस एक्साइटमेंट में उसे पढना भूल जाते हैं।
- आप कोई भी वेबसाइट ब्राउज करते हो तो वो या तो https बेस्ड होती है या वो http बेस्ड होती है।
- अगर आप https बेस्ड वेबसाइट पे जाते है तो आपकी ISP या कंपनी ये पता लगा सकती है की कौन से IP अड्रेस (कंप्यूटर) से कौन सी साइट देखि गई है, कहा जानकारी भेजी गई है लेकिन दोनों के बीच का कम्युनिकेशन 'इनक्रिप्टेड' (गुप्त भाषा में ) होने की वजह से ये पता नहीं लगा सकती की क्या-क्या कंटेंट देखा या भेजा गया है।
- http बेस्ड वेबसाइट पर जाते हो तो वहां तो आपकी ISP या कंपनी बड़े आराम से पूरी की पूरी जानकारी ट्रैक कर सकती है।
आपको ये पता होना चाहिए कि किसी भी ब्राउज़िंग मोड में ट्रैकिंग पॉसिबल है,आपकी ISP बड़े आराम से पता लगा सकते हैं कि आप कौनसी वेबसाइट पे हो और कितने बार वेबसाइट एक्सेस की है, इसीलिए इंटरनेट पर जो भी काम करें पूरी जिम्मेदारी के साथ करें।
पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏
इमेज सोर्स : गूगल
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