किसान समस्या :: एक नजरिया
किसान समस्या :: एक नजरिया
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पिछले 70 सालों में हर सरकार ने यह कहा कि , वह किसानों की सरकार है ।
और अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए हजारों योजनाए भी शुरू की ।
किसानो को ऋण देने और फिर दिए गए ऋण माफ करने के वायदे कर , सरकारें सत्ता में आती जाती रही ।
मगर किसी भी सरकार ने , यह बताने की जहमत नही उठाई , कि आखिर इतनी योजनाये चलाने और बार बार बिजली तथा बैंक ऋण माफ करने के बाद आज भी किसान आत्महत्या और आंदोलनों के लिए मजबूर क्यों है ?
दरअसल नेताओ को एक बात बहुत जल्दी समझ में आ गयी कि , जनता वोट काम पर नही देती , बल्कि उसके सामने जो समस्या है ,उसे सुलझाने का , सबसे विश्वसनीय वादा जो नेता कर पायेगा , जनता का वोट भी वही नेता पायेगा ।
अतः नेता का मुख्य काम समस्या को अगले चुनाव तक लटकाने का हो गया , ताकि उसी समस्या पर फिर वोट मांगे जा सके ।
किसान समस्या भी नेताओ की इसी सोच का परिणाम है ।क्योंकि एक बार अगर कृषि विकास का एक ठोस ढांचा खड़ा हो गया और किसान आत्म निर्भर हो गया , तो फिर किसानों के वोट , किस वायदे पर मांगे जाएंगे ?
वर्ना क्या कारण है कि , पिछले 70 सालों में हम चंद्र यान बना लेते है, अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ लेते है ,मिसाइल बना लेते है , पर , किसानों को आत्म निर्भर बनाने में सफल नही हो पाते ।?
जबकि हम एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है ।
स्थिति बदलेगी ? य यही हमारी नियति बन चुकी है ?
यक्ष प्रश्न है यह ।
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